एक दिन के बात ये
नाती - दारू के दुकान ला देख के बाबा ये दुकान मा कइसन भीड़ लगे हे गा फोकट मा बाटत हे का गा
बाबा - ये दुकान मा पागल मन ला ठीक करके उव बने ला पागल करे के दवा बिकते ।
नाती- दवाई तो नजर नई आत हे गा ।
बाबा- देख वाह दे दिखत हे न शीशी ओला पागल मनखे ला पियाबे त चुप हो जाथे उव बने ला पियाबे त बड़बड़ा थे उल्टा पुलटा काम करथे।
नाती- तभे ददा हा मुधियार के जाथे त बड़बड़ाते।
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