मोर मयारुक बहनी तोर भेजे राखी हा तिहार के एक दिन पहली मिल गे रहिस हावय। तोर बनाय राखी ला देख के मोला बहुत खुशी होइस हावय, बढ़िया करे बहनी चाइनीज़ राखी के जगह मा अपन हाथ के सुघ्घर बनाये राखी भेजे हस। तोर बनाय राखी ला देख के संगी संगवारी मन बड़ तारीफ करत रहिस हावय, अउ कहत रहिस सबके बहनी ला अपन हाथ से बनाये राखी पहनाना चाही। तोर राखी ला पहिने के बाद मन ला सम्बल अउ तन ला शक्ति मिलिस हावय, जेन तोर हाथ के बनाय राखी मा हावय ओ चाइनीज राखी मा कहाँ। मोर मयारुक बहनी मोला बतावत बड़ दुःख लागत हावय, कोरोना काल के चलते आसो के तीजा पोरा मा तोला लिहे बर नई आवत हावँव। येदे कालिच कोटवार हा गाँव मा हाँका पारे हावय गाँव गाँव मा कोरोना अपन पैर पसारत हावय आसो कोनो भी अपन बेटी बहनी ला तीजा पोरा मा लिहके झन लाहू अउ लाहू त 14 दिन तक कोरनटाइन रइही अउ उचित कार्यवाही करे जाही। तेकर सेती लेहे बर नई आवत हवँव, मोर रद्दा झन देखबे अउ मन ला हरदास झन करबे भाई हा मोला छोड़दिस कहिके, तोर भाई सदा तोर साथ हावय। आसो के तीजा तुँहर बिना सुन्ना लगही भांची भांचा सबो झन आवव त घर भरे भरे लगय अउ तीजा पोरा के खुशी हा दुगुना हो जावय।
माटी दाई के मया, अचरा के हे छाँव। सुघ्घर माटी मोर हे, माटी माथ नवाँव।। उत्ती बेरा के जिहाँ, चिरई बोलय चाॅव । इहि माटी मा हे बसे, मोरो सुघ्घर गाॅव ।। मोर गद्य रचना कोठी
अगस्त 07, 2020
भाई के पाती मयारुक बहनी के नाँव
मोर मयारुक बहनी तोर भेजे राखी हा तिहार के एक दिन पहली मिल गे रहिस हावय। तोर बनाय राखी ला देख के मोला बहुत खुशी होइस हावय, बढ़िया करे बहनी चाइनीज़ राखी के जगह मा अपन हाथ के सुघ्घर बनाये राखी भेजे हस। तोर बनाय राखी ला देख के संगी संगवारी मन बड़ तारीफ करत रहिस हावय, अउ कहत रहिस सबके बहनी ला अपन हाथ से बनाये राखी पहनाना चाही। तोर राखी ला पहिने के बाद मन ला सम्बल अउ तन ला शक्ति मिलिस हावय, जेन तोर हाथ के बनाय राखी मा हावय ओ चाइनीज राखी मा कहाँ। मोर मयारुक बहनी मोला बतावत बड़ दुःख लागत हावय, कोरोना काल के चलते आसो के तीजा पोरा मा तोला लिहे बर नई आवत हावँव। येदे कालिच कोटवार हा गाँव मा हाँका पारे हावय गाँव गाँव मा कोरोना अपन पैर पसारत हावय आसो कोनो भी अपन बेटी बहनी ला तीजा पोरा मा लिहके झन लाहू अउ लाहू त 14 दिन तक कोरनटाइन रइही अउ उचित कार्यवाही करे जाही। तेकर सेती लेहे बर नई आवत हवँव, मोर रद्दा झन देखबे अउ मन ला हरदास झन करबे भाई हा मोला छोड़दिस कहिके, तोर भाई सदा तोर साथ हावय। आसो के तीजा तुँहर बिना सुन्ना लगही भांची भांचा सबो झन आवव त घर भरे भरे लगय अउ तीजा पोरा के खुशी हा दुगुना हो जावय।
जुलाई 23, 2020
निबंध- कोरोना वाइरस
एकठन अइसन वाइरस जेला हमन अपन खुले आँखी ले देख नई पावन, नानकुन गोटी ले कई गुना छोटे हावय। एकर सम्पर्क भोजन आय जेकर कारण तेजी ले फैलत हावय। एकर वैज्ञानिक नाम कोरोना वाइरस (कोविड नाइन्टिन) हावय। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) हा एला महामारी घोषित कर दे हावय।
*कोरोना वाइरस काय हरे?*
कोरोना वाइरस अइसन वाइरस आय जेकर संक्रमण ले संक्रमित ला जोर के बुखार, सर्दी अउ सूखा खाँसी के संग साँस ले मा तकलीफ होथे। अइसन वाइरस पहली कभू नई देखे गे रहिस हावय। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तेज बुखार, सर्दी, सूखा खाँसी अउ साँस ले मा तकलीफ एकर लक्षण आय। ए वाइरस ला रोके बर कोनो प्रकार के टिका (वैक्सीन) नई बन पाय हावय, विश्व के सबो देश एकर ऊपर अपन टिका बनाय के प्रयोग करत हावय। कोरोना वाइरस संक्रामक रोग होय के कारण सम्पर्क आय ले एक दूसर ऊपर तेजी ले फैलत हावय। ये वाइरस सबले पहली चीन के वुहान मा पाय गे रहिस हावय, ते पाय के एकर जन्म दाता या जन्म स्थान चीन के वुहान शहर ला माने गे हावय। आज ये रोग हा सरी देश ला अपन चपेट मा ले ले हावय।
*कोरोना वाइरस के लक्षण*
कोविड नाइन्टिन बीमारी के शुरुआती समय मा कोनो प्रकार ले लक्षण नई दिखय। 14 दिन बाद लक्षण एकर दिखथे जेकर कारण संक्रमित मनखे के पहचान तुरन्ते नई हो पाय। कोरोना रोग मा सबले पहली तेज बुखार फेर सूखा खाँसी, सर्दी अउ साँस ले मा तकलीफ होथे। कोरोना वाइरस के रोग ज्यादा बढ़े ले साँस ले मा ज्यादा परेशानी, निमोनिया अउ मनखे के मौत तको हो जाथे। सियान-समारत, छोटे-छोटे लइका, गर्भवती महिला अउ अस्थमा, मधुमेह, हिरदय के बीमारी वाला मन ला ज्यादा खतरा रहिथे। अइसने लक्षण जुकाम अउ फ्लू मा तको पाय जाथे।
*कोरोनो वाइरस ले संक्रमित होगेंव त ?*
कोरोना वाइरस के ईलाज नइहे एकर बीमारी ला कम करे बर दवाई दे जाथे। आप जब तक ठीक नई होय हव तब तक सबले दूर रहव, ककरो सम्पर्क मा झन आँव। अमेरिका, रूस, इटली, जापान जइसे विकसित देश मन हार खा गे हावय। कोरोनो बीमारी के वैक्सीन बनाय बर काम चलत हावय अउ एंटीवाइरल दवा के परीक्षण तको चलत हावय।
*कोरोनो वाइरस ले बचाव के उपाय*
कोरोना वाइरस बीमारी महामारी के रूप ले ले हावय अउ सरी जगत मा अपन पाँव ला पसार सब ला लिलत हावय। कोरोना वाइरस के कोनों ईलाज नइहे एकर बचाव हमर सावधानी ले ही हो सकथे। बचाव के उपाय-
1) घर के बाहिर जावत खानी सदा मास्क ला पहिन के निकलव बिना कारण के घर ले बाहिर झन जाव।
2) अपन आप ला भीड़- भाड़, सावर्जनिक जगह जइसे- हॉस्पिटल, ऑफिस, हाट, दुकान, पारा मोहल्ला के सभा ले दूर रहव।
3) खांसत अउ झिकत खानी मुँह ला तोप के ख़ाँसव झिकव अउ सार्वजनिक जगह मा झन थुकव।
5) अपन हाथ ला बार बार साबुन पानी ले धोवव अउ एल्कोहल आधारित सेनेटाइजर के उपयोग करव।
6) सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट ( बस, ऑटो- टैक्सी, ट्रेन, रिक्शा ) के उपयोग झन करव।
7) सरकारी आदेश अउ दिशा निर्देश के पालन करव, शासन के गाइड लाइन के अनदेखी झन करव।
8) कोरोना के लक्षण अपन आप मा दिखाई देवत हावय त शासन ला सूचित करव।
9) कोनो शहर या संक्रमित जगह ले आवत हव त 14 दिन तक अपन आप ला कोरनटाइन करव।
10) अपन मास्क ला सार्वजनिक जगह में झन फेकव ओला जला दव या कचरा पेटी में डार देवव।
*कोरोना वाइरस के दुष्प्रभाव*
कोरोना वाइरस के गम्भीर दुष्परिणाम निकलिस हावय। आज सरी जगत के अर्थव्यवस्था चरमरा गे हावय अउ कईठिन समस्या ला उजागर कर दे हावय। आज भारत देश मा कोरोना ले लाखो करोड़ो मनखे के रोजगार ला छीन ले हावय। कोरोना के फइले ले दूसर प्रदेश मा जाके कमइया बनिहार अउ मजदूर मन बेरोजगारी अउ गरीबी मा दिन ला काटत हावय। फैक्टी, बस, ऑफिस, छोटे बड़े दुकान लॉकडाउन मा बन्द होंगे जेकर ले आर्थिक मंदी आगे हावय अउ विकास हा एकदम से ठप होंगे हावय। विद्यालय, महाविद्यालय के बन्द होय ले पढ़ाई लिखाई तको ठप होंगे हावय। लाखो विद्यार्थी मन के भविष्य खराब होवत हावय। कोरोना महाकाल कई ठिन समस्या ला पनपात हावय जइसे- गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य समस्या, सामाजिक अउ परिवारिक जइसन समस्या।
*प्रकृति बर वरदान*
कोरोना वाइरस के महाकाल मनखे मन बर अभिशाप बनिस त प्रकृति बर वरदान घलो बनिस हावय साबित। कोरोना के चलते सरी जगत मा लॉक डाउन रहिस। मोटर गाड़ी फैक्ट्री मन सब बन्द रहिस जेकर चलते प्रदूषण में कमी आइस। एक रिपोर्ट के हिसाब ले कई बच्छर बाद ये बच्छर प्रदूषण मा 50% गिरावट आइस हावय। आज वातारवरण पहली ले साफ अउ स्वच्छ होंगे हावय। प्रदूषित नदिया मन के पानी मन तको साफ होइस हावय।
*उपसंहार*
जल्दी से जल्दी कोरोना के फैलत वाइरस ला रोके बर उपाय करें जावय। कोरोना के अइसने मामला बढ़त रही त हमर विकास के गति 50 बछर पछवा जही अउ अइसन दिन आही की कोरोना के महामारी समचे मनखे ला चट कर जाही। मनखे हाथ मा हाथ धरे देखते रह जाही। आज हमन कोरोना ले सीख लेवन अउ प्रकृति से छेड़ छाड़ झन करन। मनखे ले भगवान बने के चक्कर मा अति उपद्रव झन करन, सबो ला अपन समझत मानवता रखिन।
-हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा
जुलाई 22, 2020
मोर नींद ले ककरो भला होगे
जुलाई 08, 2020
छत्तीसगढ़ी साहित्य के भाषा मा उपलब्धता
छत्तीसगढ़ी साहित्य के भाषा मा उपलब्धता
रचनाकार : हेमलाल साहू
छत्तीसगढ़ के माटी मा अनेक कवि अउ लेखक मन अपन कविता, लेख अउ कहानी के माध्यम ले साहित्य रचत आवत हें। हमर पुरखा मन के कतको रचना आज तक प्रकाशित नइ हो पाइस, फेर ओमन जनमानस मा लोकप्रचलित रहिन। आज घलाव कतको ददरिया, सुवा गीत, करमा गीत, भरथरी गीत, लोकगाथा, पंथी गीत, किसिम-किसिम के हाना अउ रंग-बिरंगी कहानी सुने ला मिलथे। ये सबो रचना मन के पुस्तक के रूप मा प्रकाशन नइ होय के कारण ओमन के रचनाकार मन के नाम आज हमन नइ जानन। फेर अपन उच्च कोटि के साहित्यिक गुणवत्ता के कारण ये रचना मन पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा के माध्यम ले एक पीढ़ी ले दूसर पीढ़ी तक पहुँचत आवत हें। आज एमा ले बहुत अकन रचना मन ला संग्रहित करके रखे गे हे। फेर आज घलाव कतको रचना हमर बीच मौखिक रूप मा जनमानस तक पहुँचत हें अउ सुने ला मिलथें।
देखत-देखत जमाना बदलत गिस। प्रिंट मीडिया अउ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास होइस। ए समय म हमर पुरखा कवि अउ लेखक मन कतको रचना रचिन अउ अपन किताब घलाव छपवाइन। फेर ये किताब मन छत्तीसगढ़ी जनमानस तक ओतका नइ पहुँच पाइन, जेतका पहुँचई के जरूरत रहिस। जेन कविता, कहानी अउ गीत मन जनमानस तक पहुँचिन, ओमन म ले बहुत अकन रचना लोककला के माध्यम ले या रेडियो प्रसारण के जरिए लोगन तक पहुँच पाइन।
एकर कई ठन कारण हो सकत हें। पहिली बात, ओ समय छत्तीसगढ़ अलग राज्य नइ बनिस रहिस। छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश के हिस्सा रहिस। हो सकथे कि ओ समय शासन-प्रशासन के स्तर मा छत्तीसगढ़ी भाषा अउ साहित्य ला ओतका महत्त्व नइ मिलत रहिस, जेतका मिलना चाही रहिस। दूसर बात, ओ समय गाँव-गाँव मा शिक्षा के पर्याप्त सुविधा नइ रहिस। गाँव के बहुत अकन मनखे मन पढ़े-लिखे नइ रहिन। यदि ओमन करा किताब रहितिस, तब घलाव पढ़े-लिखे के कमी के कारण साहित्य तक पहुँच पाना कठिन रहितिस।
धीरे-धीरे लोगन मन शिक्षित होय लगिन। छत्तीसगढ़ के गाँव-गाँव ले पढ़े-लिखे मनखे निकलिन अउ बड़े-बड़े पद मा काम करे लगिन। फेर दुख के बात ये रहिस कि हमर पढ़े-लिखे समाज के एक बड़े हिस्सा हा अपन भाषा अउ साहित्य ला ओतका महत्त्व नइ दिस। कुछ मनखे मन ला अइसन लगत रहिस कि छत्तीसगढ़ी बोले अउ पढ़े ले लोगन ओमन ला गंवार समझहीं। ए सोच के कारण कतको शिक्षित मनखे मन अपन मातृभाषा अउ साहित्य ले दूरावत गिन।
वास्तव मा, ये शिक्षित मनखे मन गाँव-गाँव मा छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रचार-प्रसार कर सकत रहिन। ओमन अपन भाषा के कविता, कहानी अउ लेख ला पढ़के, सुनाके अउ दूसर मन ला पढ़े बर प्रेरित करके छत्तीसगढ़ी साहित्य के परचम लहरा सकत रहिन। फेर अपन साहित्य के प्रति उदासीनता के कारण हमर पुरखा मन के कतको किताब अउ रचना जनमानस तक नइ पहुँच पाइन।
अब आज के जमाना के बात करथन। प्रिंट मीडिया अउ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बाद संचार क्रांति के माध्यम ले मोबाइल अउ इंटरनेट के व्यापक उपयोग होवत हे। सोशल मीडिया आज समाज के अलग-अलग वर्ग तक पहुँच गे हे। फेसबुक, व्हाट्सऐप, ट्विटर अउ ब्लॉग जइसन माध्यम मन साहित्य के प्रचार-प्रसार के नवा रद्दा खोलिन हें।
आज छत्तीसगढ़ी साहित्य के उपलब्धता के बात करन, त डिजिटल माध्यम मन साहित्य ला जनमानस तक पहुँचाय के महत्त्वपूर्ण साधन बन गे हें। भले ये साहित्य छपे किताब के रूप मा नइ होवय, फेर डिजिटल माध्यम मा उपलब्ध रचना मन घलाव किताब के साहित्यिक महत्त्व रखथें। आज कतको कवि अउ लेखक मन अपन ब्लॉग के माध्यम ले रचना मन ला सुरक्षित रखत हें। ए माध्यम के सबसे बड़े फायदा ये हे कि मनखे मन अपन सुविधा के अनुसार, कोनो भी जगह बइठ के, मोबाइल या कंप्यूटर मा साहित्य पढ़ सकथें।
एकर ले बड़े उपलब्धि अउ का हो सकत हे कि हमर छत्तीसगढ़ी साहित्य आज इंटरनेट के माध्यम ले देश-दुनिया तक पहुँचत हे!
आदरणीय संजीव तिवारी जी के 'गुरतुर गोठ डॉट कॉम' ब्लॉग मा कतको नवा अउ जुन्ना रचनाकार मन के रचना उपलब्ध हें। ए ब्लॉग छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य अउ संस्कृति के संरक्षण अउ प्रचार-प्रसार मा महत्त्वपूर्ण योगदान देत हे।
इही किसम ले आदरणीय रमेश सिंह चौहान जी घलाव अपन संकलन अउ ऑनलाइन माध्यम के जरिए रचना मन ला पाठक तक पहुँचाय के काम करत हें। ऑनलाइन किताब के उपलब्धता अउ बिक्री के माध्यम ले पाठक मन घर बइठे साहित्य तक पहुँच सकथें।
फेर एक सवाल आज घलाव हमर सामने खड़े हे—का हमर किताब मन के बिक्री संतोषजनक होवत हे? का पाठक मन छत्तीसगढ़ी साहित्य के किताब खरीदे अउ पढ़े बर पर्याप्त रुचि दिखावत हें? आज के परिस्थिति ला देखके साहित्य के किताब मन के बिक्री अउ पाठक संख्या के भविष्य के बारे मा चिंता होना स्वाभाविक हे। फेर ए बात ला घलाव नकारे नइ जा सकय कि आज डिजिटल माध्यम हमर साहित्य बर एक बड़े अवसर के रूप मा उभर के आइस हे।
आज डिजिटल युग हे। लोगन मन अपन जरूरत के बहुत अकन चीज ऑनलाइन खोजथें। अइसने म हमर साहित्य ला घलाव डिजिटल माध्यम मा उपलब्ध कराय के जरूरत हे। किताब छपवाना गलत नइ हे, फेर साहित्य ला केवल छपे किताब तक सीमित रखना उचित नइ हे। हमन ला छपे किताब के संग-संग ऑनलाइन साहित्य के उपलब्धता ऊपर घलाव जोर देना चाही।
ए दिशा मा हमर छंद परिवार हा बढ़िया काम करत हे। 'छंद खजाना' अउ 'गद्य खजाना' ब्लॉग के माध्यम ले लगभग अस्सी कवि मन के कविता अउ लेख ऑनलाइन उपलब्ध कराय गे हें। ए माध्यम ले देश-दुनिया के पाठक मन छत्तीसगढ़ी साहित्य ला पढ़ सकथें। ए प्रयास हमर भाषा अउ साहित्य के संरक्षण, संवर्धन अउ प्रचार-प्रसार के दिशा मा महत्त्वपूर्ण कदम हे।
हमर साहित्य के उपलब्धता के सही अर्थ केवल ए नइ हे कि हमर रचना मन इंटरनेट मा रखे गे हें। असल उपलब्धता तभे सार्थक होही, जब पाठक मन ओला खोज सकहीं, पढ़ सकहीं, समझ सकहीं अउ अपन जीवन मा ओकर महत्त्व ला महसूस कर सकहीं। साहित्य के ऑनलाइन उपलब्धता के संग-संग ओकर गुणवत्ता, भाषा के सहजता अउ पाठक तक पहुँच के व्यवस्था घलाव जरूरी हे।
आज हमला किताब छपवाय के लालसा ले ऊपर उठके साहित्य के व्यापक प्रचार-प्रसार के बारे मा सोचे ला परही। एकर मतलब ये नइ हे कि किताब छपवाना बंद कर देय जाय। किताब के अपन महत्त्व हे अउ ओला बनाए रखना जरूरी हे। फेर आज के समय मा डिजिटल माध्यम ला अपनाके साहित्य के पहुँच ला अउ व्यापक बनाय जा सकथे।
मोबाइल ला पढ़े-लिखे के साधन बनाके, ब्लॉग मा उच्च गुणवत्ता के रचना मन ला सुरक्षित रखके अउ फेसबुक अउ व्हाट्सऐप जइसन सोशल मीडिया के माध्यम ले साहित्य के प्रचार-प्रसार करके हमन अपन भाषा ला जन-जन तक पहुँचा सकथन। ए संग-संग समाचार-पत्र, पत्रिका अउ किताब मन मा घलाव छत्तीसगढ़ी साहित्य ला नियमित जगह मिलना चाही।
हमर रचना मन के भाषा सरल, सहज अउ जनमानस के समझ मा आवइया होना चाही। एकर संग साहित्यिक गुणवत्ता, मौलिकता अउ विचार के गहराई घलाव बने रहना चाही। जब हमर साहित्य मा लोकजीवन, लोकसंस्कृति, लोकपरंपरा, सामाजिक समस्या अउ मनखे के सुख-दुख के सजीव चित्रण होही, तब पाठक मन ओकर संग अपन जुड़ाव महसूस करहीं। अइसने साहित्य पाठक मन के रुचि बढ़ाही अउ हमर भाषा ला मजबूत बनाही।
अंत मा ए बात कहना उचित होही कि छत्तीसगढ़ी साहित्य के भविष्य केवल किताब के प्रकाशन मा नइ, बल्कि ओकर व्यापक उपलब्धता, पाठक तक पहुँच अउ साहित्य के प्रति जनमानस के रुचि बढ़ाय मा निहित हे। हमन ला अपन पुरखा मन के मौखिक साहित्य ला सहेजे के संग-संग आज के रचना मन ला घलाव डिजिटल अउ मुद्रित माध्यम मा सुरक्षित रखना हे।
जब हमर साहित्य जन-जन तक पहुँचही, तबे हमर भाषा के मान बढ़ही। जब पाठक मन हमर साहित्य ला पढ़हीं, तबे हमर साहित्य के विकास के रद्दा अउ मजबूत होही।
जय छत्तीसगढ़ी भाषा। जय छत्तीसगढ़ी साहित्य।
— हेमलाल साहू
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा (छत्तीसगढ़)
जुलाई 07, 2020
*चौमास*
*भगवान विष्णु के सोये के बेरा*
वेद पुराण मा चौमास ला भगवान विष्णु के सोये (शयनकाल) के बेरा बताय हावय। ये चार महीना मा भगवान योग निद्रा मा रहिथे। वेद पुराण के अनुसार भगवान विष्णु हा वामन अवतार ले रहिस हावय। वामन अवतार मा भगवान विष्णु हा राक्षस राज बलि ले तीन पग भुइँया मांगे रहिस हावय अउ राजा बलि तीन पग भुइँया दान करे रहिस हावय। पहली पग मा भगवान वामन हा जम्मो पृथ्वी ला, आकाश ला अउ सब्बो दिशा ला ढंग लिस। दुसरइया पग मा जम्मो स्वर्ग लोग ला ले लिस। तीसरा पग बर कुछ नई बचिस त बलि हा अपन आप ला समर्पित करत भगवान ला अपन मुड़ मा पग ला रखे ला कहिथे। भगवान बलि के दान ले खुश होके ओला पताल लोक के राजा बनाथे अउ वर मांगे ला कहिथे। राजा बलि भगवान मेर चार महीना पताल लोक मा रहे बर वर माँगथे। तब भगवान बलि के भक्ति ला देख के ओला वरदान देथे की चार मास पताल लोक मा रइही। इहि चार मास पताल लोक मा भगवान योग निद्रा मा रहिथे। ये चौमास महीना मा वेद पुराण के अनुसार बिहाव, यज्ञ अउ शुभ काम ला नई करय।
धर्म शास्त्र के अनुसार जग के संचालन अउ रेख देख जगत पालन हार भगवान विष्णु हा करथे, फेर भगवान सोये बर चल देथे त सबो रेख देख जग के संचालन ला भगवान शिव अउ उँकर परिवार हा करथे। ये चौमासा मा शिव अउ उँकर परिवार ले जुड़े सब्बो व्रत तिहार ल मनाय जाथे। सावन महीना हा पूरा भगवान शिव ला समर्पित रहिथे। भक्त मन भगवान के उपवास रखथे अउ खूब पूजा अर्चना करथे। कतको भक्त मन ये महीना मा बाल दाढ़ी नई कटवावय। एकर बाद भादो मास मा भगवान गणेश के दस दिन ले जन्मोत्सव मनाय जाथे। कुंवार महीना मा शारदीय नवरात्रि मा दुर्गा दाई के बड़े धूम धाम ले पूजा भक्ति करथे।
हमर छत्तीसगढ़ मा चौमास आषाढ़, सावन, भादो अउ कुंवार महीना के बड़ महत्व हावय। छत्तीसगढ़ राज कृषि प्रधान राज आय अउ इहाँ के जम्मो मनखे मन खेतिहर जिनगी से जुड़े हावय। हमर छत्तीसगढ़ के खेती किसानी के शुरुवात ये चौमासा मा ही होथे बुवाई, रोपाई, निदाई जम्मो कार्य आषाढ़ से कुंवार तक होथे अउ इहि महीना मा ज्यादा रेख देख करे ला परथे। छत्तीसगढ़ मा तिहार के शुरुवात इहि चौमास ले होथे। पहली हरेली तिहार फेर इतिवार या सोमवार (सवनाही) तिहार,नागपंचमी, राखी तिहार, भोजली तिहार, कमरछठ, आठे कन्हैया, तीजा पोरा, गणेश चतुर्थी, पितर पाख अउ मा दुर्गा स्थापना शारदीय नवरात्रि। ये जम्मो तिहार ला छत्तीसगढ़ के लोग बाग मन बड़े धूम धाम से मनाथे। चौमासा मा कभू कभू दिन हा रात बरोबर लगथे काबर की बरखा रानी अपन रंग मा रहिथे ता ऊंखर करिया करिया बादल सुरुज देव् ला ढंग देथे अउ जग हा कुलप अँधियार हो जाथे। इहि चौमास मा नदिया, नरवा, तरिया, बाँध जम्मो लबालब भर जा रहिथे। चारो मुड़ा हरियर हरियर रुख राई देखे बर मिलथे अइसे लगथे जैसे स्वर्ग अउ धरती एक होंगे हावय। प्रकृति अपन चरम सीमा मा रहिथे अउ जन मानस ला अबड़ भाथे। किसान अउ बनिहार मन प्रकृति के बड़ मजा लेवत घाम, भूख - प्यास अउ दुख पीड़ा बुलाये खेतिहर काम ला करत रहिथे। कभू कभू ये चौमास मा बरखा रानी पानी नई गिराय अउ अकाल होय के डर रहिथे ता जम्मो परब मा किसान अउ बनिहार मन के पीड़ा ला छलकत देखे जा सकथे।
मँय सुरता करावत हव हमर पुरखा कवि अउ लेखक मन ला जेमन कतका सुघ्घर चौमास के बखान करे हावय................
बपुरी बसुधा के बुताइस पियास हर।
हरियागे भुइयां सुग्धर मखेलमलसाही,
जामिस हे बन, उल्होइस कांदी-घास हर।।
जोहत रहिन गंज दिन ले जेकर बांट,
खेतिहर-मन के पूरन होगे आस हर।
सुरुज लजा के झांके बपुरा-ह-कभू-कभू,
"रस-बरसइया आइस चउमास हर"।।
*सावन आगे आबे आबे आबे संगी मोर*
खेती-खार छ्लछलावय, रिमझिम बरसात मा
तरिया ताल लबलबावय, नरवा नदिया डबडबावय
पुरवइया नीक लागे हो…...
आगे हरेली, मजा लागय झूमर नाच मा
जुड़ जुड़हा सिपा मारय, घुर घुरहा हिया काँपय
पुरवइया नीक लागे हो…..
रहि रहि के गरजत हे बादर जी
बड़े बिहिनिया ले करे हे झक्कर जी
रुमझुम रुमझुम बरिसत हे पानी
कइसे मँजा के मोर खेती किसानी
रेंग बइला झप झप, झिन कर आंतर
चल मोर भइया बियासी के नांगर।
भुइयाँ मा बरखा आथे।
जिनगी ला ओसार बनाये बर
भुइयाँ मा बरखा आथे।
सोन बनाये बर माटी ला
सपना ल सिरतोन करे बर
आँसू ला बनिहार बनाये बर
भुइयाँ मा बरखा आथे।
झिमिर झिमिर जस पानी बरसे
महकै खेतखार के माटी
घुडुर घुडुर जस बादर गरजै
डोलै नदिया परबत घाटी
नांगर धरके निकलिन घर से, सबै किसान कमैया।।
अब मँय नवा कवि डहर आप सब मन के ध्यान ला लेगत हौवव। खासकर के छंद परिवार के कवि मन डहर जौन सुघ्घर सुघ्घर अलग अलग छंद मा सुघ्घर रचना करे हावय........
रझ रझारझ जल झरे। खेत खार सर भरे।
नाचथे असाड़ मा। बन नदी पहाड़ मा।
*असाढ़* मा देखव.........
आगे हवय असाढ़ अब,हाँसत हवँय किसान।
नॉगर बइला ला धरे, अउ टुकनी मा धान।
अउ टुकनी मा धान,खेत कोती जावत हें।
मन मा खुशी अपार,गीत मन भर गावत हें।
पानी बरसत देख,ताप भुइयाँ के भागे।
खेती मीत असाढ़,झमाझम नाचत आगे।
बियास करे सब धान ल देखव मूड़ उठा लहरावत हावै।।
इहाँ भुइँया सब डाहर सुग्घर सावन मा हरियावत हावै।
छमाछम बूँद ह नाचत गावत शोर घलो बगरावत हावै।।
बरसे बदरा बिजली चमके, सुन झींगुर गीत सुनावत हे।
छइँहा खुसरे बइला गरुवा, सब जा परछी सकलावत हे।।
दबके बइठे मनखे घर मा, घबरावय जीव लुकावत हे।
नइ रेंगत हे रसता मनखे, मन मा डर आज सतावत हे।।
सबके मन मे आस जगत हे, आही बरखा रानी।1।
सावन भादो महिना आगय, रात लगे अँधियारी।।2।
ग्राम गिधवा, पोस्ट नगधा
तहसील नवागढ़, जिला बेमेतरा